शिव ताण्डव स्तोत्रम् के बारे में
भगवान शिव · Stotram
← शिव ताण्डव स्तोत्रम् पर वापस जाएँ
📜 शिव ताण्डव स्तोत्रम् के बारे में
शिव ताण्डव स्तोत्रम् भगवान शिव की स्तुति में रचा गया एक श्रद्धेय स्तोत्र है। परंपरा के अनुसार इसकी रचना का श्रेय लंका के विद्वान राजा और शिवभक्त रावण को दिया जाता है।
एक प्रचलित मान्यता है कि रावण ने कैलास पर्वत पर भगवान शिव की श्रद्धा में इसकी रचना की।
इस स्तोत्र में शिव के ब्रह्मांडीय ताण्डव नृत्य, जटाओं से बहती गंगा, मस्तक पर चंद्रकला, गले में सर्प और तीसरे नेत्र की अग्नि का वर्णन है। डमरू की ताल जैसे लंबे, लयबद्ध समासों के लिए भी यह प्रसिद्ध है।
पहले पंद्रह श्लोक शिव की स्तुति करते हैं और अंतिम दो श्लोक श्रद्धा से पाठ करने के फल का वर्णन करते हैं, विशेषकर प्रदोष काल में।
शिव तांडव स्तोत्र
आगे पढ़ने के लिए कोई एक खंड चुनें।
📿 बोलसम्पूर्ण शिव ताण्डव स्तोत्रम् पढ़ें🕉️ शिव ताण्डव स्तोत्रम् का अर्थप्रत्येक श्लोक का अलग-अलग अर्थ🙏 शिव ताण्डव स्तोत्रम् का पाठ कैसे करेंभक्तिपूर्ण साधना के लिए सरल मार्गदर्शन🕰️ शिव ताण्डव स्तोत्रम् का पाठ कब करेंपरंपरागत समय और अवसर🌺 पारंपरिक महत्वभगवान शिव से जुड़े भक्ति-मूल्य✨ शिव ताण्डव स्तोत्रम् का सारस्तोत्र की केंद्रीय भावना